Scratch

 Relation is like a glass

A scratch on one side

Will reflact on any side

Always handel feeling carefully

Because

Scratch can,t be removed.








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ये निर्ममता…

प्रद्युम्न की मौत के 10 दिन बाद भी मासूम बच्चे का ख्याल जेहन से निकल ही नही रहा है।7 साल के मासूम की इतनी निर्ममता से हत्या? ईश्वर की बनाई अनुपम कृति मानव इतना निर्दयी कैसे हो सकता है।क्या एक बार भी उसे बच्चे के मासूम चेहरे पर दया नही आई। ऐसे हत्यारे के लिए तो मौत की सजा भी कम है क्योंकि मौत तो जीवन बंधन से मुक्ति है और मुक्ति इनकी सजा नही हो सकती ।इन्हें तो तड़प तड़प कर पूरी जिंदगी काटने की सजा मिलनी चाहिए ताकि इनका जीवन ऐसे लोगो के लिए सबक बन सके।

हमारी सोच

हम इंसानों का दिमाग भी एक तरह का “डस्टबिन” ही है। क्यूंकि हम इसमें अपने बुरे अनुभव,बुरी यादे,बुरे लोग ही संभाल कर रखते है। हमारे साथ अगर नौ अच्छी बाते हुई है और एक बुरी बात तो हमारे दिमाग में सिर्फ वो बुरी बात ही स्टोर रहती है और अच्छी बाते  हम भुला देते है। और उस एक बात को सोच कर हम दुखी भी रह लेते है।

यही बात रिश्तो में भी लागु होती है। कोई एक रिश्ता जिससे हमारे बुरे अनुभव,बुरी यादे जुडी है हमारे ध्यान का केंद्र बिंदु हमेशा  वही रहता है और हम दुखी परेशान रहते है।इसके चलते हम अपनी जिंदगी की बाकी खुशियों को महसूस ही नही कर पाते। जिंदगी में सबको सब कुछ बुरा नही मिलता किसी को बहुत ध्यान रखने वाले माता-पिता मिले है तो किसी को बेहद प्यार करने वाला जीवन साथी,किसी के पास बेहद प्यारे-प्यारे बच्चे है तो किसी को बहुत परवाह करने वाले,प्यार करने वाले भाई- बहन मिले है।ऐसे रिश्ते जिन्हें पाकर हम खुद पर गर्व महसूस कर सके,खुद को खुश रख सके। लेकिन नही ,हमारी नकारात्मक सोच हमे ऐसा नही करने देती।

अगर हमे खुश रहना सीखना है तो सबसे पहले हमे अपनी नकारात्मक सोच पर अंकुश लगाना होगा ताकि हमे मिली खुशियों को हम महसूस कर पाए,खुल कर खुश होकर जी सके।

घाव

कहते है वक्त हर घाव भर देता है पर क्या शब्दों से लगे घाव भी वक्त भरता है?

शयद इसीलिए रहीम जी ने कहा है-

“रहिमन धागा प्रेम का,मत तोड़ो छिटकाय

    टूटे से फिर ना जुड़े,जुड़े गाँठ पड़ जाए।”